इस समय एक ओर जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था अमेरिका ईरान युद्ध से तबाह हो रही है वहीं अफ्रीका महाद्वीप के कुछ देश जैसे की Democratic Republic of Congo और Yuganda इबोला वायरस के कहर से जूझ रहे हैं। हालात इतनी खराब हो चुकी है की WHO( विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने Public Health Emergency of International Concern यानी अन्तर्राष्ट्रीय अलर्ट जारी कर दिया है क्योंकि हालात इससे कभी भी बहुत खराब हो सकते हैं, हालांकि यह वायरस corona की तरह हवा के माध्यम से नहीं फैलता और इससे संक्रमित क्षेत्र के लोगों को चिन्हित करके और उनको isolate किया जाय ताकि यह आगे और लोगों में ना फैले। यदि आप इस वायरस के इतिहास, हस्तांतरण, लक्षण, बचाव के तरीके, इलाज और WHO की प्रतिक्रिया के बारे मे जानना चाहते हैं तो आगे तक अवश्य पढें ।
इबोला का इतिहास-
इबोला (Ebola) एक अत्यंत घातक वायरस है, जो मनुष्यों और कुछ जानवरों में गंभीर रक्तस्रावी बुखार (Hemorrhagic Fever) पैदा करता है। इसकी मृत्यु दर कई प्रकोपों में 25% से 90% तक देखी गई है।
Ebola वायरस की पहचान सबसे पहले 1976 में हुई थी और उस समय इसके दो प्रकोप का असर देखा गया था –
• Sudan
• Democratic Republic of Congo
1976 के प्रकोप में इस वायरस से सैकड़ों लोग संक्रमित हुएं और भारी संख्या में लोगों की मौतें हुईं थी । इस वायरस का नाम कांगो की इबोला नदी के नाम पर पड़ा क्योंकि यह वायरस सबसे पहले इस नदी के आसपास फैला था । 1976 में खोजे जाने के बाद इबोला वायरस 40 से अधिक बार दुनिया के सामने लौट चुका है, और आज भी यह मानवता के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है। पर यह वायरस 1995, 2014-16 बहुत बड़े स्तर पर लोगों को अपनी चपेट में लेता है और उनकी मौत का कारण बनती है ।2014-2016 के प्रकोप में Guinea ,Liberia ,Sierra Leone जैसे देशों ने इसकी बड़ी कीमत चुकाई थी। करीब 28000 से अधिक मामले नजर में आएं और करीब 11000 से अधिक लोगों को इस वायरस से मारे गयें।
वायरस का हस्तांतरण-
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस टेरोपोडिडे परिवार के फल खाने वाले चमगादड़ ऑर्थोबोलावायरस प्राकृतिक मेजबान होते हैं। इस वायरस के फैलने कई और कारण हैं जैसे- पीड़ित व्यक्ति के पसीने के सम्पर्क में आने पर, उसके मल , उल्टी और रक्त के संपर्क में आने पर वह व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है और साथ ही साथ मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार से यदि वह व्यक्ति इससे संक्रमित होकर मारा गया हो। इबोला रोग से पीड़ित मरीजों का इलाज करते समय स्वास्थ्य और देखभाल कर्मी अक्सर संक्रमित हो जाते हैं। ऐसा तब होता है जब संक्रमण नियंत्रण सावधानियों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता और मरीजों के साथ निकट संपर्क होता है।

लक्षण-
इबोला वायरस से संक्रमित होने के बाद आमतौर पर 2 से 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन बाद में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।इबोला रोग के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और इनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे और यकृत के कार्य में गड़बड़ी के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि यदि इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाय तो ये सामान्य वायरल बुखार से भी मिलते जुलते हैं। इसलिए बिना किसी मेडिकल जाँच रिपोर्ट के इबोला से संक्रमित कहना गलत साबित हो सकता है।
बचाव के तरीके-
किसी भी बीमारी को महामारी बनने से रोकना है तो सामुदायिक भागीदारी बहुत जरूरी है एक व्यक्ति किसी भी बीमारी को खत्म नहीं कर सकता है क्योंकि यदि सभी लोग नियमित साफ-सफाई करें , गंदगी न फैलाएं तो किसी भी बीमारी को रोकने में थोड़ी मदद जरूर मिल सकती है। इसके अतिरिक्त कुछ निम्नलिखित तरीके हैं- • इबोला से संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, पसीने, उल्टी, मूत्र और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से बचें।
• मरीज की देखभाल करते समय सुरक्षात्मक उपकरण (PPE) का उपयोग करें।
• साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं।
• बीमार या मृत जंगली जानवरों को न छुएं।
• इबोला से मृत व्यक्ति के शव को सीधे न छुएं।
• स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें।
• संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई सुई, कपड़े, बिस्तर और चिकित्सा उपकरणों को बिना सुरक्षा के न छुएं।
• इबोला प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध स्वीकृत वैक्सीन संक्रमण के जोखिम को कम कर सकती हैं।
• स्वास्थ्य कर्मियों और उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए टीकाकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इलाज-
इबोला वायरस रोग (Ebola Virus Disease) एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है। वर्तमान में इबोला का उपचार मुख्य रूप से रोगी को सहायक चिकित्सा (Supportive Care) प्रदान करने पर आधारित है, जिससे शरीर संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो सके।
1. शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति-
इबोला के मरीजों को अक्सर तेज बुखार, उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी हो जाती है। इसलिए उन्हें ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) या नसों के माध्यम से तरल पदार्थ (IV Fluids) दिए जाते हैं।
2. ऑक्सीजन और रक्तचाप का प्रबंधन-
गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी तथा रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए विशेष चिकित्सा सहायता दी जाती है।
3. संक्रमणों का उपचार-
इबोला के दौरान होने वाले अन्य बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार के लिए डॉक्टर आवश्यकतानुसार दवाएं दे सकते हैं।
4. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार-
कुछ मामलों में इबोला वायरस के खिलाफ विकसित विशेष मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाओं का उपयोग किया जाता है, जो वायरस से लड़ने में मदद करती हैं।
5. अस्पताल में निगरानी-
गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा जाता है ताकि किसी भी जटिलता का तुरंत उपचार किया जा सके।
WHO की प्रतिक्रिया-
जब किसी बीमारी का प्रकोप सामने आता है, तो डब्ल्यूएचओ प्रकोप से निपटने, बीमारी का पता लगाने, सामुदायिक सहभागिता, संपर्क ट्रेसिंग, टीकाकरण, टीके और उपचार परीक्षण, केस प्रबंधन, प्रयोगशाला सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण, रसद और सुरक्षित एवं सम्मानजनक दफन प्रथाओं के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करके प्रतिक्रिया देता है। इबोला वायरस की अधिक जानकारी के लिए WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/ebola-disease